हस्तपादोत्तानासन के अभ्यास की विधि, फायदे तथा सावधानियां (Hastpadottanasana benefits, technique and precautions in Hindi)

योगासनों का अभ्यास हमें शारीरिक रूप से फिट रखता है इसके बाद मानसिक व भावनात्मक स्तरों पर अपना प्रभाव डालता है| आजकल अनेक व्यायाम पद्धतियाँ हैं जो शरीर को स्वस्थ रखने के उद्देश्य से अपनाई जा रही हैं|

परन्तु इनके द्वारा व्यायाम करने से मांसपेशियों की गति तीव्र रहती है जिससे हृदय व फेफड़ों की गति भी तीव्र हो जाती है जो स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकती हैं| योगासनों द्वारा शरीर की मांसपेशियों, आंतरिक अवयवों, नस-नाड़ियों तथा शारीरिक ढांचे का विकास सही प्रकार से होता है| योग साहित्य में इस बात पर बल दिया गया है कि मानव की समस्याओं का समाधान केवल योग में है|

हस्तपादोत्तानासन क्या है (what is Hastpadottanasana)?

पीठ के बल लेटकर किए जाने वाले आसनों में यह एक सरल व महत्वपूर्ण आसन है| हस्तपादोत्तानासन चार शब्दों के मेल से बना है हस्त + पाद + उत्तान + आसन | यहाँ हस्त का अर्थ है हाथ, पाद का अर्थ है पैर, उत्तान का अर्थ है चित लेटकर व आसन का अर्थ है मुद्रा| इस आसन का अभ्यास करते समय हम चित लेटकर पैरों व हाथों को ऊपर की ओर उठाते हैं इसलिए इसे हस्तपादोत्तानासन कहा जाता है|

हस्तपादोत्तानासन करने का तरीका (Procedure of Hastpadottanasana in Hindi)

Step 1: पीठ के बल लेटें| एड़ी-पंजे मिलाएं|

Step 2: दोनों हाथ शरीर के नजदीक रखें| हथेलियों का रुख आसन की ओर हो|

Step 3: अब श्वास भरते हुए, बिना घुटनों को मोड़े दोनों पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठायें व पंजे बाहर की ओर तानें|

Step 4: अब धड़ को ऊपर उठाते हुए हाथों को पैरों की तरफ तानें|

Step 5: जितने पैर ऊपर उठेंगें उतने ही कंधे ऊपर उठाने हैं|

Step 6: यह पूर्णता की स्थिति है, कुछ क्षण रुकें व सामान्य श्वास लेते रहें|

Step 7: श्वास छोड़ते हुए धीरे-धीरे दोनों हाथों व पैरों को वापिस आसन पर रखें|

Step 8: अब शवासन में विश्राम करें|

हस्तपादोत्तानासन (Hastpadottanasana) करने की सही विधि व इसकी पूरी जानकारी आप मेरे इस youtube link पर भी देख सकते हैं|

हस्तपादोत्तानासन के फायदे (Hastpadottanasana benefits in Hindi)

Hastpadottanasana benefits Hindi
धरण के दोष दूर होते हैं: इस आसन के करने से नाभि अपने स्थान पर रहती है जिससे धरण के दोष दूर होते हैं|

पाचन ठीक रखने में सहायक: इस आसन का नियमित अभ्यास करने से पेट के अवयव प्रभावित होने से पाचन ठीक रहता है व कब्ज की समस्या से राहत मिलती है|

हर्निया के दोष दूर होते हैं: हस्तपादोत्तानासन का नियमित अभ्यास किया जाये तो हर्निया के दोष दूर करने में मदद मिलती है|

शरीर की अतिरिक्त चर्बी (Fat) घटती है: हस्तपादोत्तानासन का अभ्यास करते समय जब हम हाथों व पैरों को ऊपर की ओर उठाते हैं तो Thighs, Hips, पेट व कमर प्रभाव में आती हैं जिससे यहाँ की चर्बी घटती है|

मांसपेशियां मजबूत होती हैं: पंजे, टखने, पिंडली, पेट, कमर, रीढ़, फेफड़े, कंधे, कोहनी, कलाई के प्रभाव में आने से शरीर की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं|

तनाव व चिंता से मुक्ति: इस आसन का नियमित अभ्यास तनाव व चिंता को दूर करने में मदद करता है|

हस्तपादोत्तानासन किन-किन के लिए वर्जित है (Hastpadottanasana is prohibited for whom)?

हस्तपादोत्तानासन का अभ्यास किन-किन लोगों को नहीं करना चाहिए|

  • जिनके पेट की सर्जरी हुई हो उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए|
  • जिन्हें हर्निया की दर्द अधिक हो उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए|
  • गर्भावस्था में यह आसन नहीं करना चाहिए|
Babita Gupta

M.A. (Psychology), B.Ed., M.A., M. Phil. (Education). मैंने शिक्षा के क्षेत्र में Assistant professor व सरकारी नशा मुक्ति केंद्र में Counsellor के रूप कार्य किया है। मैं अपने ज्ञान और अनुभव द्वारा blog के माध्यम से लोगों के जीवन को तनाव-मुक्त व खुशहाल बनाना चाहती हूँ।

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