सुप्त वज्रासन के फायदे, अभ्यास की विधि तथा सावधानियां (Supta Vajrasana benefits, procedure and precautions in Hindi)

स्वस्थ शरीर के बिना व्यक्ति के जीवन में किसी भी सफलता की आशा नहीं की जा सकती| शरीर को स्वस्थ बनाये रखने के लिए आजकल अनेक शारीरिक व्यायाम-पद्धतियाँ प्रचलित हैं| लेकिन योगा-आसन एक ऐसी पद्धति है जिसको अपनाने से शरीर को रोग-मुक्त, तनाव-रहित, भय-मुक्त, अवसाद-मुक्त, इम्युनिटी-युक्त बनाने में मदद मिलती है| साथ ही साथ इसमें तीव्र गति न होने से शरीर थकने से भी बचता है व शरीर का सुसमन्वित विकास होता है|

सुप्त वज्रासन क्या है (what is Supta Vajrasana)?

बैठ कर किये जाने वाले आसनों में सुप्त वज्रासन बहुत महत्वपूर्ण आसन है| सुप्त वज्रासन तीन शब्दों के मेल से बना है सुप्त + वज्र + आसन | यहाँ सुप्त का अर्थ है सोया हुआ या झुका हुआ| वज्र का अर्थ है कठोर (Thunderbolt) तथा आसन का अर्थ है आकृति या मुद्रा| आसन करते हुए हम वज्रासन में बैठ कर पीछे की ओर झुकते हैं इसलिए इसे सुप्त वज्रासन या Reclined Thunderbolt Pose कहते हैं|

Supta Vajrasana benefits in Hindi

सुप्त वज्रासन की विधि (Supta Vajrasana Procedure/Steps in Hindi)

Step 1: सुप्त वज्रासन के लिए पहले वज्रासन में बैठें|

Step 2: वज्रासन के लिए घुटनों को मोड़े, पैर के अंगूठे मिले हों तथा एडियां खुली हों| एडियों के मध्य में बैठें|

Step 3: अब सुप्त वज्रासन के लिए दोनों पैरों को दाएं-बाएं खोलें व उन के बीच के स्थान में बैठें|

Step 4: दोनों हाथों से पैरों के टखने या तलवे पकड़ें व पहले दाईं कोहनी आसन पर रखें, फिर बाईं कोहनी भी आसन पर रखें|

Step 5: धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें| अब दोनों भुजाएं सिर से पीछे सीधी रखें| हथेलियों का पृष्ठ भाग आसन से लगा हो|

Step 6: घुटने व thighs आपस में मिले हों तथा घुटने ऊपर न उठें|

Step 7: अब हथेलियों को सिर के नीचे रखें|

Step 8: यह पूर्णता की स्थिति है अब सामान्य श्वास लेते रहें| कुछ क्षण इसी अवस्था में रुकें|

Step 9: फिर टखने पकड़ कर दाईं कोहनी का सहारा लेते हुए उठकर बैठें व वज्रासन में विश्राम करें|

सुप्त वज्रासन (Supta Vajrasana) करने की सही विधि व इसकी पूरी जानकारी आप मेरे इस youtube link पर भी देख सकते हैं|

सुप्त वज्रासन के फायदे (Supta Vajrasana benefits in Hindi)

फेफडों में श्वास लेने की क्षमता: जब हम आसन करते हुए पीछे की ओर झुकते हैं तो हमारे फेफड़े फैलते हैं| इससे फेफडों में श्वास लेने की क्षमता बढ़ती है| इस आसन के करने से सांस संबंधी रोग दूर होते हैं|

चर्बी घटती है: सुप्त वज्रासन करने से पेट, thighs, hips व कमर की चर्बी कम होती है|

High B.P. की समस्या में आराम: सुप्त वज्रासन करने से high B.P. के दोष दूर होते हैं|

सर्वाइकल के लिए महत्वपूर्ण: सुप्त वज्रासन करने से कंधे और गर्दन पर प्रभाव पड़ता है जिससे कंधे व गर्दन का दर्द दूर होता है तथा सर्वाइकल के दर्द में राहत मिलता है

रक्त का संचार: सुप्त वज्रासन का नित्यप्रति अभ्यास करने से शरीर में रक्त का संचार सुचारू रूप से होता है जिससे पूरे शरीर में oxygen व पोषक तत्व पहुंचते हैं|

पाचन क्रिया: सुप्त वज्रासन का नियमित अभ्यास करने से पाचन क्रिया ठीक रहती है तथा कब्ज की समस्या से राहत मिलती है|

घुटने तथा पीठ दर्द में आराम: घुटने, टखने तथा पीठ के प्रभावित होने से इनके दर्द को दूर करने में यह आसन लाभकारी है|

प्रजनन अंग strong: यह आसन reproductive organs के लिए लाभकारी है इस आसन का नियमित अभ्यास करने से प्रजनन अंग पुष्ट बनते हैं|

रीढ़ strong: इस आसन के करने से रीढ़ लचीली व मजबूत बनती है तथा इसके दोष दूर होते हैं|

सुप्त वज्रासन किन-किन के लिए वर्जित है? (For whom Supta Vajrasana prohibited)?

यह आसन कंधे, गर्दन, घुटने व पीठ आदि के दर्द को दूर करने में लाभकारी है लेकिन ध्यान रखें कि किन-किन को यह आसन नहीं करना चाहिए|

  • जिन्हें घुटनों में दर्द हो उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए|
  • जिन्हें slip-disc की समस्या हो या पीठ में दर्द अधिक हो उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए|
  • जिन्हें सर्वाइकल (cervical) की समस्या अधिक हो या गर्दन में दर्द अधिक हो उन्हें भी यह आसन नहीं करना चाहिए|
  • जिन्हें High B.P. की समस्या अधिक हो या चक्कर आते हों उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए|

Babita Gupta

I am Babita Gupta M.A.(Psychology), M.Phil. (Education) want to share my knowledge and experiences which I have gained over the years. As an Educationist and Counsellor, I am dedicated to release the stress.

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