तनाव/स्ट्रेस बच्चों में हिंदी में (Stress in children in Hindi)

जब आस –पास का वातावरण अनुकूल न हो तो हर व्यक्ति तनाव का शिकार हो सकता है| अर्थात तनाव किसी को भी हो सकता है| इस प्रकार न केवल युवक बल्कि बूढ़े व बच्चे भी तनाव का शिकार हो जाते हैं| बच्चे को तनाव किसी भी स्थिति के कारण हो सकता है| 

एक limit में तनाव होना एक सामान्य बात है| कोई भी काम करने के लिए या problem solve करने के लिए brain पर मानसिक दबाव होना आवश्यक है| इसी दबाव के कारण हम काम करते हैं| जैसे routine के काम समय पर करना या कोई समस्या आने पर उस का समाधान करना आदि इसी तनाव या दबाव के कारण संभव हो पाता है| अगर हम ये सब समय पर नहीं कर पाते हैं तो हमारा stress ओर अधिक बढ़ जाता है| इसलिए एक limit में स्ट्रेस होना आवश्यक है| जिस प्रकार अधिक स्ट्रेस किसी मानसिक रोग का कारण हो सकता है, उसी प्रकार स्ट्रेस/दबाव की कमी भी मानसिक समस्या उत्पन्न कर सकती है| लेकिन अगर तनाव सदैव रहने लगे तो दिमाग व शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है|

Stress in children in Hindi

बच्चे बड़े कोमल मन के होते हैं| जिस प्रकार पांचों उँगलियाँ बराबर नही होती उसी प्रकार सभी बच्चे बराबर नही होते| हर बच्चा अपने आप में अलग होता है| बचपन से ही बच्चों को किसी न किसी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है| जिससे उन में तुलना करनी शुरू कर दी जाती है जिस के कारण उनमें तनाव उत्पन्न होना एक सामान्य बात है|

कई बार बच्चा सिर दर्द , पेट दर्द, आदि की शिकायत करके स्कूल न जाने के बहाने करता है| जोकि डॉक्टर की दवाई से भी ठीक नहीं होता| इसका कारण स्ट्रेस हो सकता है| घरेलू या आसपास के वातावरण में ज्यादा दबाव के कारण भी बच्चे में तनाव हो सकता है| यह तनाव ज्यादा समय तक रहने पर बच्चे में गुस्सा व रोष के लक्ष्ण दिखाई देते हैं|

बच्चों में स्ट्रेस/तनाव के कारण

  • प्रतिस्पर्धा के इस युग में बच्चों में पढ़ाई का दबाव भी तनाव का एक कारण है| इस तनाव के कारण उनकी पढ़ाई प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होने लगती है तथा उनके तनाव को ओर अधिक बढ़ा देती है| 
  • दिनचर्या के बिगड़ने से भी तनाव हो जाता है|
  • आत्मविश्वास कम होने से और मेहनत कम कर पाने से भी तनाव बढ़ता है|
  • क्षमता से अधिक काम करने पर भी अगर रिजल्ट ठीक न मिले, तब भी तनाव उत्पन्न हो सकता है|
  • बच्चों में नींद की कमी भी उनके तनाव को बढ़ा देती है| इससे उनमें चिड़चिड़ापन व गुस्सा बढ़ जाता है| बच्चा जिद्दी हो जाता है|
  • बच्चों में स्ट्रेस बढ़ने के कारण उस का असर मेटाबोलिज्म पर पड़ने लगता है, जिससे उन में digestion ठीक प्रकार से नही हो पाता| भोजन के सही पाचन से शरीर को जो उर्जा मिलती है, उससे इम्युनिटी बढ़ती है| लेकिन digest ठीक न होने के कारण बच्चों में सिरदर्द, चिड़चिड़ापन आदि की समस्या उत्पन्न हो जाती है जोकि तनाव को ओर बढ़ा देती है|

बच्चों में स्ट्रेस/तनाव के लक्ष्ण 

  • पढ़ाई में अरुचि,
  • स्कूल न जाने के बहाने बनाना 
  • बहुत अधिक TV देखना
  • शारीरिक रोगों की शिकायत करना
  • भूख में परिवर्तन  
  • वजन कम होना या बढ़ना  
  • डर , उदास रहना तथा चिडचिडापन 
  • गुस्सा आना व चिल्लाना 
  • सिरदर्द, पेटदर्द, आदि 
  • भूलना 
  • दूसरों को चिड़ाना

बच्चों में स्ट्रेस/तनाव को दूर करने के उपाय   

  • भरपूर नीदं लें : –  बच्चों को काम के साथ-साथ 6- 8 घंटे की नींद लेना आवश्यक है| पूरी नींद लें लेकिन जरूरत से ज्यादा न सोएं|
  • काम को बांटें : – स्कूल के काम से दबाव महसूस न करें| याद करने में परेशानी हो तो स्कूल के काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें तथा एक बार में एक छोटा हिस्सा याद करें या लिखें|
  • प्रतिस्पर्धा न करें : – पढ़ाई का pressure न लें| समय पर अपनी पढ़ाई करें| पढ़ाई को लेकर किसी से प्रतिस्पर्धा न करें| पढ़ाई से भयभीत होकर तनाव न बढनें दें|
  • बातें करें : – अपनी परेशानियों के बारे में अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों को बताएं| निराशा या तनाव के समय ये आप को बेहतर तरीके से समझा सकते हैं| इससे आपको मानसिक शांति मिलेगी तथा तनाव को दूर रखने में आसानी होगी|
  • ध्यान करें : – ध्यान करना फायदेमंद है| इससे तनाव से बचा जा सकता है| तनाव में मानसिक संतुलन रखने के लिए किसी दवा की आवश्यकता नहीं होती| 10-15 मिनिट के  ध्यान के नियमित अभ्यास से तनाव को दूर करने में सहायता मिल जाती है|  प्राणायाम के अभ्यास से मन शांत होने लगता है| इससे शरीर व मन को अधिक उर्जा मिलती है तथा तनाव से मुक्त होने की क्षमता बढ़ती है|  
  • योगाभ्यास करें : – मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नियमित आसन तथा प्राणायाम बहुत आवश्यक है| ध्यान – केन्द्रित करने , स्मरण शक्ति बढ़ाने और निर्णय लेने की शक्ति बढ़ाने के लिए योग का सहारा लें| प्रतिदिन आसनों का अभ्यास करने से बच्चों के तनाव में कमी आने लगती है तथा बच्चे स्वस्थ रहते हैं| 
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माता पिता का सहयोग

बच्चों के लिए समय निकालें : – माता-पिता को अपने बच्चों के लिए समय जरूर निकालना चाहिए| उनसे उन की पढ़ाई के बारे में,स्कूल व घर के मित्रों के बारे में पूछें| उन का टाइम-टेबल बनाने में मदद करें|

योजना बनाएं : – माता-पिता को चाहिए की वे अपने बच्चे के काम की योजना बनाएं| जैसे क्या-क्या काम करने हैं, कितने समय में करने है आदि| यह भी योजना बनाएं कि अगर काम समय पर खत्म नहीं हुआ तो बचे हुए काम को कब और कैसे करवाना है| इस प्रकार काम करवाने से आप स्वयं भी तनाव मुक्त रहेंगे ओर बच्चे को भी तनाव मुक्त रख पाएंगे|  

मित्र की तरह व्यवहार : – माता-पिता को बच्चों के साथ मित्र की तरह व्यवहार करना चाहिए| जैसे उनके साथ खेलें, उनके साथ घुमने जाएँ, प्यार से उन की कठिनाइयों के बारे में बात करें, उन की प्रशंसा करें| इससे बच्चों का तथा माता-पिता का स्ट्रेस कम हो जाता है तथा दोनों को खुशियाँ मिलती हैं|

तुलना न करें : – कई माता पिता बच्चे की तुलना दूसरे बच्चे से करने लगते हैं, जोकि गलत है| तुलना करने से बच्चे का मनोबल कम होता है| बच्चा खुद को कमजोर महसूस करने लगता है और स्ट्रेस में रहने लगता है| इसलिए तुलना न करें| 

सकारात्मक विकास : -दूसरों के प्रति स्वस्थ दृष्टिकोण विकसित करने के लिए बच्चों की भावनाओं का सम्मान करें| उनकी स्वतंत्र अभिव्यक्ति को बढ़ावा दें| उनकी रुचियों का विकास करें| उनको कहानियाँ व महापुरुषों की जीवनियाँ पढ़ने की आजादी दें| इससे उनकी शब्द और भाषा की समझ बढ़ेगी| वे दूसरों के सामने अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करते समय या बात करते समय घबराएंगे नहीं| इससे वे प्रगति भी करेंगे तथा नया करने से भी नहीं हिचकेंगे|

प्रकृति की गोद में जाएँ : – बच्चों को पढ़ाई के कारण स्ट्रेस हो रहा हो तो प्रकृति की ओर लेकर जाएँ जैसे पार्क, या पहाड़ियों के आस-पास | इससे वे प्रकृति के साथ जुड़ते हैं| पक्षियों का चहकना, नदियों की लहरों की कलकल ध्वनि, सूर्य का उदय व अस्त होना, फूल व पौधों की सुन्दरता, ठंडी हवा का सहलाना आदि मन व शरीर को सुकून से भर देता है| इससे स्ट्रेस दूर हो जाता है|

ध्यान लगाने में मदद करें : – बच्चे active व creative होते हैं| खाली समय में उनको कोई creative काम करवाएं जैसे पेंटिंग, क्राफ्ट, ड्राइंग आदि| छोटे बच्चों को फूल, फल, आदि में रंग भरने को दें| चाहें तो colour-book लाकर भी दे सकते हैं| बच्चे इन कामों को करने में रूचि लेते हैं| धीरे-धीरे वे बारीकी व सफाई से काम करना सीख जाते हैं| जब उनका पूरा ध्यान इस तरह के बारीक़ कामों में रहता है तो इससे उनकी एकाग्रता बढ़ती है, दिमाग शांत रहता है तथा तनाव से मुक्त रहता है|    

लगन से काम करने में मदद करें : – पूरा प्रयास करने पर भी यदि बच्चे को सफलता न मिले तो परेशान न हों | उस के प्रयास में क्या कमी रह गई है, इस पर विचार करें| उस कमी को खोजें, उसे दूर करें और फिर से प्रयास करें| लगन से काम करने में मानसिक संतुलन बना रहेगा तथा स्ट्रेस भी नहीं होगा|

समय की पाबंदी : – बच्चों को शुरू से ही समय के पाबंद बनाएं| जब बच्चा 3-4 साल का होता है और बातों को समझने लग जाता है, तभी से उसके सोने, उठने, खाने, खेलने का समय निश्चित कर दें| ये आदतें बहुत सामान्य तरीके से विकसित हो जाती हैं| इससे बच्चा दिनचर्या का पालन करना तथा इच्छाओं पर control करना सिख जाता है| इससे आप दोनों ही तनाव से मुक्त रहते हैं|

दूसरों द्वारा प्रेरित : – कई बार बच्चे अपने माता-पिता की बजाए दूसरों को ज्यादा महत्व देते हैं| इसलिए parents को उस व्यक्ति से सलाह करके बच्चे को उस व्यक्ति से प्रेरित करवाना चाहिए जैसे teacher आदि| इससे बच्चे की सफलता पर इस का अच्छा प्रभाव पड़ता है तथा वह तनाव मुक्त रहता है|

परामर्श : – जब माता-पिता के सहयोग के बाद भी बच्चों में दैनिक कार्यों को करने में लगातार कठिनाई पैदा होने लगे तो परामर्श तथा चिकित्सा आवश्यक हो जाती है| इसलिए किसी मनोचिकित्सक से सुझाव लें व बच्चे को तनावमुक्त करने में मदद करें|

Babita Gupta

I am Babita Gupta M.A.(Psychology), M.Phil. (Education) want to share my knowledge and experiences which I have gained over the years. As an Educationist and Counsellor, I am dedicated to release the stress.

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