वृद्धावस्था में स्ट्रेस/तनाव होने के कारण तथा उन के उपचार के तरीके

हम सब को कभी न कभी स्ट्रेस का सामना करना पड़ता है जब हम जवान होते हैं तो स्ट्रेस का सामना आसानी से कर लेते हैं परन्तु वृद्धावस्था में ये उतना आसान नहीं होता| शरीर तथा मन स्ट्रेस को मैनेज करने में हेल्प करता हैं, लेकिन इस अवस्था में मन तथा शरीर दोनों ही स्ट्रेस को मैनेज करने में हमारा साथ नहीं देते| 

वृद्धावस्था में व्यक्ति  को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिसके कारण उसे स्ट्रेस होता है| बी.पी., हार्ट व lungs की समस्या, शूगर की समस्या, बालों का झड़ना, दांतों की समस्या के कारण व्यक्ति  परेशान रहने लगता है और स्ट्रेस को हेंडल करने में कठिनाई महसूस करता है|

जीवन में स्ट्रेस या तनाव होना एक सामान्य बात है| यह कोई चिंता का विषय नहीं है| फिर भी किसी प्रकार का स्ट्रेस या तनाव होने पर वृद्ध व्यक्ति को शांत मन से अपने अनुभव का लाभ उठाना चाहिए| पहले उन्हें अपनी असफलताओं व स्ट्रेस के कारणों का विश्लेषण करना चाहिए| जैसे ही अपनी कमजोरियों का पता चले तो उन्हें मनोवैज्ञानिक ढंग से अपनी परेशानीयों को दूर करके मजबूत बनना चाहिए|

Stress management old age in Hindi

वृद्धावस्था में स्ट्रेस/तनाव के कारण  (Causes of stress in old age)

वृद्धावस्था में व्यक्ति ज्यादा स्ट्रेस महसूस करता है तथा स्ट्रेस से निकलने में अपनेआप को असमर्थ पाता है| स्ट्रेस/तनाव होने के अनेक कारण  हो सकते हैं|

  • वृद्धावस्था में शारिरिक समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं|
  • थकान होने लगती है|
  • आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ता है| 
  • दूसरों पर आश्रितता महसूस होती है|
  • व्यक्ति को हाई बी.पी., मोटापा, मधुमेय, हार्ट प्रॉब्लम आदि होने की आशंका होती है|
  • दांतों की समस्या, बालों का झाड़ना व सफेद होना आदि समस्यों का सामना करना पड़ता है|
  • भोजन चबाने व पचाने में समस्या होती है|
  • तला हुआ, मीठा, चटपटा भोजन, खाने को मन करता है जोकि डॉक्टर ने मना किया हुआ है|
  • चलना फिरना आसान नहीं होता|
  • गिरते स्वास्थ्य के कारण स्ट्रेस होता है|
  • वृद्ध व्यक्ति छोटी-छोटी बातों को परेशानी का बड़ा कारण मानने लगता है|

ये सभी कारण व्यक्ति में स्ट्रेस उत्पन्न करते हैं| यदि व्यक्ति एक के बाद एक stress देने वाली situations को face करता रहता है तो धीरे-धीरे ये tention या depression का रूप ले सकता है|  

वृद्धावस्था में स्ट्रेस/तनाव के प्रकार ( type of stress in old age)

स्ट्रेस जीवन की एक सामान्य प्रक्रिया है| कोई खुशी की बात भी स्ट्रेस का कारण हो सकती है| कोई भी कार्य या घटनाएँ जो हमारे साथ होती हैं, वे हमारे जीवन पर शारीरिक या मानसिक रूप से प्रभाव छोड़ती हैं| हम अपने विचारों से, वातावरण से अच्छे या बुरे स्ट्रेस का अनुभव करते हैं| स्ट्रेस दो प्रकार के होते हैं|

  • Acute stress / positive stress यह स्ट्रेस कम समय के लिए होता है| यह किसी परिस्थति को मैनेज करने में मदद करता है| यह सामान्य है| यह तभी होता है जब हम कुछ नया करते हैं| सभी लोग कभी न कभी स्ट्रेस का अनुभव करते हैं| इसे धनात्मक (positive) स्ट्रेस भी कहते हैं|
  • Chronic stress / negative stress यह स्ट्रेस लम्बे समय तक रहता है| यह एक सप्ताह, एक महीना, या इससे भी अधिक समय तक रह सकता है| कई बार हम इस स्ट्रेस के इतने आदि हो जाते हैं कि हम इसको पहचान भी नहीं पाते| अगर स्ट्रेस अधिक रहने लगे तो यह समस्या का रूप ले सकता है |chronic stress में व्यक्ति की सोचने, याद रखने तथा सामान्य व्यवहार करने की क्षमता प्रभावित होती है| स्ट्रेस के कारण मोटापा बढ़ने लगता है, इम्युनिटी कम हो जाती है, शूगर तथा depression की समस्या बढ़ जाती है| ज्यादा स्ट्रेस होने पर बुढ़ापा जल्दी आता है, चेहरे पर झुरियां पड़ जाती है| अगर हम स्ट्रेस को मैनेज करने के तरीके नहीं अपनाते तो हमें शारीरिक व मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है| इसे नकारात्मक (negative) स्ट्रेस कहते हैं|

वृद्धावस्था में स्ट्रेस/तनाव के लक्ष्ण  (symptoms of stress in old age)

स्ट्रेस के जो लक्ष्ण होते हैं, वृद्धावस्था में भी उसी प्रकार के लक्ष्ण दिखाई देते हैं| स्ट्रेस व वृद्धावस्था के लक्ष्ण काफी समान होते हैं, इसलिए कई बार ये पहचानना मुश्किल हो जाता है कि ये लक्ष्ण स्ट्रेस के हैं या वृद्धावस्था के| स्ट्रेस के लक्ष्ण अलग-अलग व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं| हो सकता है जो एक व्यक्ति के लिए स्ट्रेस हो उसका दूसरे पर कोई प्रभाव ही न हो| स्ट्रेस के प्रति हर व्यक्ति का अपना नजरिया है| स्ट्रेस के निम्नलिखित लक्ष्ण हो सकते हैं| 

  • स्ट्रेस में सिरदर्द, पेट खराब रहने लगता है | 
  • बी.पी. बढ़ना, चेस्ट-पैन, जैसे शारीरिक लक्ष्ण दिखाई देते हैं|
  • मन उदास रहता है|
  • कुछ करने को मन नहीं करता|
  • चिंता, नींद की कमी, कब्ज ही समस्या हो सकती है|
  • शरीर में दर्द होने लगता है|
  • उठने बैठने में परेशानी होने लगती है|
  • चिडचिडापन रहने लगता है|
  • गुस्सा आने लगता है|
  • व्यक्ति को याद कम रहता है|
  • आत्मविश्वास कम होने लगता है| 
  • स्ट्रेस ओर अधिक हानिकारक हो सकता है यदि व्यक्ति स्ट्रेस दूर करने के लिए शराब, सिगरेट, ड्रग्स का सहारा लेने लगे|
  • तनाव अधिक बढ़ने पर depression का रूप ले सकता है|

वृद्धावस्था में स्ट्रेस/तनाव को दूर करने के तरीके (Management of stress in old age)

स्ट्रेस/तनाव से हमें कभी न कभी गुजरना पड़ता है| परन्तु अगर ये पता हो कि स्ट्रेस को कैसे manage किया जाये, तो जीवन जीना आसन हो जाता है| स्ट्रेस को manage करने के कुछ तरीके हैं, जिनसे इसको manage किया जा सकता है| अगर हम स्ट्रेस में हों तो इनमें से कोई भी तरीका अपना कर स्ट्रेस को दूर कर सकते हैं|

  • भरपूर नींद लें : – वृद्धावस्था में ठीक से नींद न आना स्ट्रेस को बढ़ता है| इस अवस्था में कई बार हम चलने के काबिल भी नहीं रहते, जिससे थकान कम होने के कारण भी नींद कम आती है, जिससे स्ट्रेस बढ़ता है| रात को सोने से पहले दो मिनिट का ध्यान करें| इस खूबसूरत दिन के लिए भगवान का धन्यवाद करें| अच्छी जिंदगी मिली है ये सोच कर जिंदगी का धन्यवाद करें| इससे अच्छी नींद आएगी और जिंदगी खुशहाल हो जाएगी| 
  • पौष्टिक आहार : – बहुत ज्यादा शूगर (मीठा) या बहुत ज्यादा नमक से भरा (युक्त) खाना न खाएं| यह शरीर के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है| अधिक शूगर मधुमय को तथा अधिक नमक बी.पी. को बढ़ा सकता है| पौष्टिक आहार लें व थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार खाएं| मौसमी फल व सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं| ब्लू-बेरी, ब्रोकली, बदाम, हरी सब्जियां खाएं| चाय कॉफी की जगह ग्रीन-टी व दूध लेने की आदत डालें| तला हुआ भोजन कम खाएं| सुबह का खाना पौष्टिक व हेवी लें| दोपहर को दही, दाल, सब्जी, सलाद का सेवन करें| रात का भोजन हल्का, मात्रा में कम तथा सुपाच्च्य होना चाहिए|
  • चलने की आदत बनाएं : –  अपने सामर्थ्य के अनुसार टहलें| टहलते समय चेहरे तथा मन में खुशी के भाव होने चाहियें| सकारात्मक विचार मन में लायें| जिंदगी की खूबसूरती के बारे में विचार करें| जिंदगी में हमेशा अच्छा नहीं होता, फिर भी सोचें जिंदगी कितनी अच्छी है| आप को जिंदगी से क्या मिला है, यह सोचकर जिंदगी का आनंद लेना सीखें|
  • सामूहिक योगाभ्यास करें : – योग करना एक महान क्रिया है| वृद्धावस्था में योग करके स्ट्रेस को दूर किया जा सकता है| योग स्ट्रेस को दूर करने में धनात्मक रूप से जुड़ा है| सामूहिक योग करें| सामूहिक योग करने से नियमितता और सामाजिकता आती है| भाईचारा बढ़ता है|  योग की क्रियाओं से शरीर हल्का व चुस्त बनता है| योग से शारीरिक व मानसिक दोष दूर होते हैं|
Group practice
  • हंसी योग करें : –   हंसना सेहत के लिए अच्छा है| भागदौड़ भरी जिन्दगी से खुशियाँ कब दूर हो गई और उस की जगह तनाव ने ले ली पता ही नही चला| इस तनाव को हंसी – आसन से दूर किया जा सकता है| खुल कर हँसे| यह एक प्रकार की दवा है जो वृद्धावस्था में स्ट्रेस को कम कर देती है| हास्य योग करने से बीमारियाँ दूर होती हैं जैसे बी.पी., कम नींद आना, आदि| अकेले होने पर भी हंसना चाहिए| कोई jok सुनकर, कोई घटना याद करके, कोई फिल्म देखकर हंसा जा सकता है| हंसने से स्ट्रेस कम होता है|
Laughter yoga
  • गहरे श्वास : – गहरे लम्बे साँसों का अभ्यास करें | सुविधापूर्वक बैठें| नीचे न बैठ पायें तो किसी कुर्सी या बेंच पर बैठें| गहरे लम्बे श्वास अंदर भर लें, समर्थ्य के अनुसार रोकें व धीरे-धीरे बाहर छोड़ें | अब श्वास को समर्थ्य के अनुसार बाहर रोक कर रखें| अपनी सामर्थ्य के अनुसार कई बार करें| इससे स्ट्रेस को दूर करने में आसानी होती है, मन शांत होता है और व्यक्ति स्ट्रेस से बाहर निकल पाता है| 
deep breathing
  • ॐ का उच्चारण  ॐ का उच्चारण करें| ॐ के उच्चारण के लिए अपनी सुविधा के अनुसार किसी एक आसन में शांत बैठें| कमर गर्दन सीधी, आँखें कोमलता से बंद करें| एक लम्बा गहरा श्वास भरें, होंठों को गोल करते हुए “ओ”  तथा होंठों को बंद करते हुए “म” की ध्वनी करते हुए धीरे-धीरे श्वास को  2:1 में बाहर निकालें| इस क्रिया को सुबह व शाम को करें| इस के करने से कपाल (head) में कम्पन महसूस होता है| जिससे मन को शांति मिलती है, तथा स्ट्रेस/तनाव दूर होता है|
om mantra
  • कुछ creative करें : –  कुछ नया करें| कोई नई स्किल सीखें जैसे पेंटिंग, कढ़ाई, कुछ नया खाना बनाना आदि और उसका दैनिक जीवन में प्रयोग करें| किसी की मदद करें| हर दिन किसी के चेहरे पर मुस्कान लायें| दूसरों को खुश देखकर मन को खुशी मिलती है|
  • मित्र बनाएं : –  किसी समय सब मित्र मिलकर बैठें| उन से खुलकर बातें करें| अपनी चिंताओं व परेशानियों को उनके साथ शेयर करके स्ट्रेस को कम किया जा सकता|
     
make friends

अपने लिए जियें कुछ बुजुर्ग हमेशा तनाव से घिरे रहते हैं| कभी परिवार के रूखे व्यवहार, कभी घर की चिंता या फिर कभी अपने जीवन के बारे में सोच-सोच कर तनाव ले लेते हैं| फिर गुस्सा और चिडचिडापन मन पर हावी होने लगता है| अपनी सोच को positive रखें| Stress न लें| इससे मन शांत होता है तथा जीवन की हर शिकायत दूर हो जाती है| 

Babita Gupta

I am Babita Gupta M.A.(Psychology), M.Phil. (Education) want to share my knowledge and experiences which I have gained over the years. As an Educationist and Counsellor, I am dedicated to release the stress.

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